indian cinema heritage foundation

Nakli Nawab (1962)

Subscribe to read full article

This section is for paid subscribers only. Our subscription is only $37/- for one full year.
You get unlimited access to all paid section and features on the website with this subscription.

Subscribe now

Not ready for a full subscription?

You can access this article for $2, and have it saved to your account for one year.

Pay Now
  • Release Date1962
  • GenreDrama, Romance
  • FormatB-W
  • LanguageHindi
  • Run Time134 mins
  • Number of Reels14
  • Gauge35 mm
  • Censor RatingU
  • Censor Certificate NumberU-37050-MUM
  • Certificate Date26/11/1962
  • Shooting LocationShree Sound Studios, Dadar, Bombay-14
Share
172 views

नक़ली नवाब उस बुरे आदमी की कहानी है जिसपर हज़ार अच्छे आदमी क़ुरबान किये जा सकते हैं। यूसुफ़ बदमाश था, जुआरी था, जेब कत्रा था लेकिन एक अच्छा शायर भी था। एक मुशायरे में शहर के बड़े नवाब शराफ़त अली, छोटे नवाब शैकत अली और उनकी बहन शबनम ने जब उसे सुना तो शराफ़त अली ने उसे गालियां दी, शौकत अली ने दाद दी, और शबनम ने अपना दिल दिया। दूसरे ही दिन यूसूफ़ ने नवाब शौकत अली की जेब काट ली मगर लेने के देने पड़ गये। नक़ली नवाब बनकर यूसुफ़ अली की दौलत पर हाथ साफ करना चाहा लेकिन वहां भी उसे मंह की खानी पड़ी। इसी कशमेकश में शैकत अली को पता चल गया कि यूसुफ ही उनके स्वर्गीय मित्र का बेटा है जिसे वे बीस साल से तलाश कर रहे थे। शौकत अली उसके घर गये। मोहल्ले में तूफान खड़ा हो गया। बड़े भाई ने अपने ख़ानदान और जवान बहन का वास्ता दिया। यूसुफ ने क़सम खाई कि वह इस घर में रहकर कोई ऐसा काम नहीं करेगा जिससे नवाब शौकत अली का सर नीचा हो।

शबनम ने हर तरीक़े से उसे रिझाने की कोशिश की, मगर यूसुफ ने उठाकर भी उसके चेहरे की ओर नहीं देखा। शबनम की सहेली एक तरकीब लड़ाई और धोखे से शबनम और यूसुफ के दिलों में मोहब्बत पैदा करवा दी।

यूसुफ को जब मालुम हुआ कि शबनम नवाब शौकत अली की बहन है तो उसके पांव तले की ज़मीन खिसक गई। उसने शबनम को बहुत ही खरी खोटी सुनाई, उसे एक ही रास्ता दिखाई दिया और वह शौकत अली से झगड़ा करके घर से चला गया।

जब नवाब शौकत अली को इनकी मोहब्बत का पता चला तो वह यूसुफ को फिर घर वापस ले आया और बड़े भाई को मनाकर यूसुफ और शबनम की शादी का ऐलान कर दिया।

यह खुदा को कुछ और ही मंजूर था - ऐन मौके पर नवाब शराफत अली की शरारत का भांडा फ़ूट गया। वह एक जोहरा नामी लड़की से मौहब्बत की पेग बढा रहे थे। कई सालों तक इस बात का मुंह पैसों से बन्द होता रहा मगर आख़िर जोहरा तंग आ गई और अपना हक़ मांगने नवाब साहिब के घर चली आई। अपनी इज्जत को खतरे में देखकर उन्होंने जोहरा का खून कर दिया और वहेली से गिरकर अपनी जान देने के कोशिश की। नवाब साहिब के खानदान को बचाने के लिये यूसुफ ने यह खून अपने सर ले लिया। शबनम और उसकी मोहब्बत सिसिकियां भरने लगी। यूसुफ खूनी करार दिया गया। कल सुबह उसे फांसी हो जायगी।

ऐन मौके पर नवाब शौकत अली को एक तरकीब सूझी। मरी हुई जोहरा जिन्दा हो गई। दोनों भाइयों में ज़बरदस्त झगड़ा हुआ। अपनी आखरी हिचकियों के दरम्यान नवाब शराफत अली ने अपने ज़ुरम का इकरार कर लिया।

शबनम और यूसुफ की दुनिया में फिर से बहार आ गई।

[From the official press booklet]

Cast

Crew